Wednesday, August 10, 2016

बंधन के रिश्ते

किसी ने हम से कहा, रिश्तों के बंधन में सुकून है, पर बंधन में ही तो हर ख्वाब दम तोड़ देता है | रिश्तों की पैमाइश उनकी पकड़ से करते हैं, और दरमियान की मुहब्बत की आज़माइश करते हैं ||
जिस बंधन को फतह करने की गुफ्तगू करते हैं, उसको गिरोह में जकड़ने ना दो | हर पल को बुनते रहो सुकून से, रिश्तों को पकड़ मिलेगी बुनाई के झरोखों से ||
हमें इल्म भी नहीं होता कब रिश्ते दम तोड़ देते हैं, मतलब तो बस उनकी पेश से होता है | बयान करता बेजान बंधन है, बुझ गया है, इसलिए बोझ बन गया है ||
नासमझी के बंधन डोरियों से बाँधते हैं, खिंचाव के तनाव के मोहताज होते हैं |
रिश्ते:
खुदा की रहमत हैं, माँ की दुआ हैं, मासूम की ज़िद्द हैं, फ़िज़ा की नसीम हैं, रात की परछाई है, चाँद की नर्मी है ||
उड़ने दो आसमान की बदहवास ऊँचाई में, गिरने दो समुंदर की बेकाबू गहराई में | बहकने दो बारिश की मौज में, सिमटने दो वक़्त की तहों में ||
नाज़ुक है ये सफ़र ए रिश्तों का, जिसे बंधन के रिश्ते निभा ना पाएंगे | परवान चढते हैं रिश्तों के बंधन, बंधन नहीं कोई जिनमें ||
सहेज लो इनको मुहब्बत की गर्मी में, ठिठुर ना जाए किसी ओढनी की गाँठो में

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